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छेड़खानी

एक दिन रमेश सर (कंप्यूटर शिक्षक) जैसे ही कंप्यूटर सेंटर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सेंटर प्रबंधक श्री शमीम अहमद जी व कुछ पुलिस वाले रमेश सर के इंतजार में ही बैठे हैं। रमेश सर को देखते ही प्रबंधक महोदय ने कहा,
“यहीं है रमेश सर, जिनका आप इंतजार कर रहे थे।”

रमेश सर के अंदर आते ही इंस्पेक्टर साहब ने पूछा, “क्या आपका ही नाम रमेश है???”

“जी सर”

“कल रात 8:00 बजे आप कहाँ थे??”

“अपने घर पर”

“सच-सच बताओ?? आप कल रात कहाँ थे?? क्या आप रात घूमने नहीं गये??”

“सर घूमने तो मैं रोज जाता हूँ। हमारा खाना पीना शाम 4:00 बजे तक हो जाता है। मेरे घूमने का समय शाम 4:00 से 5:00 है। इस समय जाड़े चल रहें है। जल्दी ही अंधेरा हो जाता है। मैं 5:00 बजे तक घूम कर घर वापस आ जाता हूँ। फिर मैं कहीं भी घूमने नहीं जाता। घर पर ही रहता हूँ।

ये नियम बचपन से ही परिवार में हम सबका बना हुआ है। आप इस बारे में किसी से भी या हमारे पड़ोसी से भी पूछ सकते हो। वैसे भी हमारे पिताजी कहते हैं, मर्द बच्चा, दिन-दिन में अपने घर अच्छा । बताइए सर, क्या बात है?? क्या हुआ?? आप इस तरह से क्यों पूछ रहे हो??”

“कल रात आप 8:00 बजे आवास विकास कॉलोनी की तरफ बाइक लेकर क्या करने गए थे??”

“क्या कहा?? मैं और बाइक?? अरे सर मेरे पास सिर्फ एक साइकिल है। जिस साइकिल से मैं अभी अभी सेंटर पर आया हूँ। आप चाहें तो देख लीजिए। बाइक चलानी तो मुझसे आती ही नहीं।”

“सच सच बताओ, कल रात तुमने आवास विकास कॉलोनी में दो लड़कियों के साथ छेड़खानी की थी या नहीं की थी??”

“मैं और छेड़खानी करूंगा?? हद है आपसे… अरे सर, जब मैं आपसे पहले ही बोल चुका हूँ कि मैं अपने घर पर था तो आपको यकीन क्यों नहीं आ रहा?? चाहो तो मेरे साथ मेरे घर चलो और मेरे परिवार वालों से पता कर लो।”

“अच्छा आप बोल रहे हो कि तुम आवास विकास कॉलोनी नहीं गए तो फिर वे दोनों लड़कियां क्यों बोल रही है कि तुमने उन्हें छेड़ा??

“मैंने छेड़ा?? उनको कैसे पता कि छेड़ने वाला मैं ही हूँ?? कोई और भी तो हो सकता है। आप बिना मतलब के मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो। अच्छा सर, एक काम करते हैं। आप उन लड़कियों को यहां बुला कर ले आओ या फिर मुझे उनके पास ले चलो। मैं आमने-सामने बैठकर उन लड़कियों से बात करना चाहूंगा।

जब वे मुझे देखेंगी तो वे मुझे पहचान लेंगी कि मैं वही व्यक्ति हूँ या कोई और हूँ?? क्योंकि जिस व्यक्ति ने उनसे बात की होगी, उसकी आवाज, उसका शरीर वगैरह सब मेरे से अलग ही होगा। उन दोनों लड़कियों को यह पहचानने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए कि वह इंसान मैं ही हूं या कोई और???”

“अच्छा, अगर उन लड़कियों ने बोल दिया कि तुम ही थे उन्हें छेड़ने वाले… फिर क्या होगा??

सर, ऐसा नहीं होगा क्योंकि सबसे पहली बात तो यही है कि उनको छेड़ने वाला व्यक्ति मैं नहीं हूँ। दूसरी बात ये है कि वे दोनों लड़कियाँ झूठ क्यों बोलेंगी। मान लीजिए अगर वे झूठ बोलती हैं कि वह व्यक्ति मैं ही हूँ तो आप जो भी सजा देना चाहें मुझे दे देना। मुझे मंजूर होगी।”

जब उनको यह यकीन हो गया कि वह व्यक्ति कोई और ही है। तब उन्होंने पूरी बात बताई, वे बोले, “कल आवास विकास कॉलोनी में रात 8:00 बजे के आसपास एक व्यक्ति बाइक से आया और पैदल चल रही दोनों लड़कियों के दुपट्टों वगैरह को खींचकर उनसे छेड़खानी की, उनको गलत जगह हाथ लगाया।

जब लड़कियों ने उसका विरोध किया और उसको मारने के लिए दौड़ी तो वह व्यक्ति बोला कि मैं किसी के बाप से भी नहीं डरता। तुम्हारे बसकी जो हो सके मेरा कर लेना।” यह बोलकर जब वह जाने लगा। उसको जाता देखकर वे लड़कियां बोली, जब तू डरता किसी से नहीं है तो अपना नाम और एड्रेस बताकर जा”।

उसने कुछ नहीं कहा और धोखे से वह एक बार फिर से, उन लड़कियों के करीब आया, फिर से बदतमीजी की, दुपट्टा खींचा.. फिर बाइक तेज करके जाते हुए बोला, मेरा नाम रमेश है और मैं IICT कंप्यूटर सेंटर में कंप्यूटर सिखाने का काम करता हूँ। अब तुम्हारे जो बसकी है, वह करके दिखाना। तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगी। यह बोलकर वह चला गया।

आज उन लड़कियों ने रमेश के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई है। इसलिए हम यहां आए हैं। अब आपसे मिलकर व आपकी बातों से हमें यह संतुष्टि हो गई है कि वह व्यक्ति आप नहीं थे, वह कोई और ही होगा। अगर आपकी गलती होती तो आप इतने इत्मीनान से, विश्वास से व धैर्य से हमारे सभी सवालों के जवाब नहीं दे पाते।

कहीं ना कहीं डर आपकी बातों से, आपके आंखों से, आपकी हरकतों से छलक जाता। आप एक काम कीजिए। आप मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए। अगर जरूरत पड़ी तो आपको फोन करके कोतवाली बुला लेंगे।”

उन्होंने रमेश सर का नंबर लिया तथा उस नम्बर पर रिंग मारकर देखी। आखिर में वे संतुष्ट होकर वहां से चले गए।
उनके जाने के बाद रमेश जी सोचने लगे, “कैसे-कैसे लोग हैं जो दूसरे, अच्छे भले इंसानों को फंसाने के लिए, कैसे-कैसे जाल बुन रहे हैं?? कैसे कैसे षड्यंत्र रच रहे हैं??

ईश्वर ना करें, अगर वह व्यक्ति मेरा नाम लेकर या किसी और का नाम लेकर उन लड़कियों के साथ कुछ गलत करता, चोट पहुंचाता या उनको जान से मार देता तो मेरा या उस निर्दोष व्यक्ति का क्या होता?? वह तो बिन मौत के ही मारा जाता। उन्हें एक कहावत याद आ गई कि जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है। उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया और अपनी क्लास की तरफ बढ़ गए।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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