A typical love story

PROMISE (वादा ) – (दूसरा भाग ) | Promise Hindi kahani

PROMISE (वादा )

 (A typical love story)
     PART-2
     ●●●●●
यह तो खुशकिस्मती रही कि आकांक्षा और उसका परिवार जुलूस में शामिल न होकर आश्रम में ही रहा।मैं भगवान का लाख-लाख शुक्रगुजार हूं।
उस त्रासदी को बीते हुए 15 दिन होने को हैं लेकिन वह हादसा भुलाए नही भूलता। उस मंजर की याद आते ही मेरा रोयां-रोयां कांप उठता है।मानसिक रूप से मैं अब भी उस हादसे से उबर नहीं पाया हूँ।
पिछले दिनों आकांक्षा से मैंने बात करने की कोशिश की थी।उसने कहा कि उस दिन आश्रम में मैंने तुमको पहचान लिया था लेकिन friend साथ थी इसलिए बात नही कर पाई।
आकांक्षा का  छोटा भाई पढ़ाई करने के लिए उसी के साथ रहने आ गया है इसलिए अब हमारी बातें ज्यादा नहीं हो पातीं।
                 7 नवंबर
                 ★★★★
 यह तारीख आकांक्षा के जन्मदिवस की तारीख है।वैसे हम लोग Birthday celebration नही करते लेकिन फिर भी मैं उसे रात 12 बजते ही wish करूँगा।हालांकि फोन नही करूँगा क्योंकि  उसने बिना बताए फोन करने को मना किया है।
“Happy birthday Akanksha….” मैंने12 बजते ही उसे msg किया साथ ही कई ❤️ के आकार के स्टिकर SEND कर दिए।मुझे पता है वह सो रही होगी इसलिए उसे DISTURB करना उचित नही समझा।
“शाम को CALL करूँगा…”मैंने दूसरा Msg. किया.
                शाम को
                ◆◆◆◆
“Hello!!” मैंने शाम 6 बजे उसे कॉल किया।
“Hi!!!!” उसने कहा।वह काफी खुश लग रही है।
“Happy birthday to you….” मैंने लय में गाते हुए कहा।
“Thanks…. तुमको मेरा birthday याद था!!!!!!”
“हां!” मैं उससे कहना चाहता था कि उसकी birthday डेट को मैं किसी महत्वपूर्ण परीक्षा की तिथि की तरह याद किये हुए था।
“Very smart!!!!!!”उसने कहा।
“बोलो!! मैं तुमको तुम्हारे birthday पर कौन सा gift दूं??” मैंने उदारता दिखाते हुए यूं कहा मानो मैं कई रियासतों का इकलौता राजकुमार होऊं।
“रहने दो….तुम तो जानते ही हो कि हम लोग birthday नही मनाते”
“फिर भी…. मैं चाहता हूं कि तुम्हे कुछ gift दूं..”
“अच्छा!!!!!!!”
“सोच लो…बाद में मुकर न जाना!!!!” उसने हंसते हुए कहा।
“हमारी जुबान ही हमारा धर्म है।हम मुकरने वालों में नही हैं…. तुम मांग कर तो देखो!!!”
मैंने भावनाओं में बहते हुए कह दिया।हालांकि मैं डर भी रहा था कि कहीं कुछ उल्टा-सीधा न मांग ले जिसे मैं बेरोजगार पूरा ही न कर पाऊं।
“अच्छा!!!तो फिर तुमको मुझसे *2 Promise* करने होंगे।” उसने थोड़ा गम्भीर लहजे में कहा।
“Promise!!!!!” मैं विस्मित था। मैंने सोचा था कोई gift मांगेगी।
“Ha!!!”
“ठीक है.. बोलो!!” मैंने जी कड़ा करते हुए कहा।
“पहला promise यह है कि मैं तुमको successful देखना चाहती हूँ इसलिए तुम पहले success हो जाओ…तब तक न तो हम मिलेंगे न बात करेंगे।” उसने कहा।
“और दूसरा!!!!!” मैं डर रहा था।मैं अब भी सोच रहा था कि वह मजाक कर रही है।
“दूसरा यह कि जब तुम success हो जाना तो मुझे खोजते हुए मेरी city आ जाना…मैं तुम्हे मिल जाऊंगी.अगर न मिल पाऊं तो…..तो…मुझे भूल जाना।”
“क्या??? आकांक्षा कैसी बातें कर रही हो?” मैं घबड़ाया हुआ था।
हंसी-मजाक के चलते निर्मित हुआ हल्का माहौल अचानक बोझिल लगने लगा।
“तुमने मुझसे वादा किया है……..”उसने शांत भाव से कहा।
मैं समझ गया कि वह मजाक नही कर रही है।

 

            मेरी और माधव की बातचीत
          ■■■■◆◆◆◆◆■■■■■
“उस दिन के बाद मैंने उसे फोन करना बंद कर दिया।उसकी बात दिल पर लग गई। मैंने promise किया है इसलिए बंधा हुआ हूँ। हां!!
ये भी सही है कि उसकी याद में कोई भी दिन बिना उदास हुए गुजरता नही है। मैं अपने को उन लम्हों के लिए कोसता हूँ जब मैंने उदारता दिखाते हुए उसे कुछ मांगने के लिए कहा।”
“वह भी तुम्हे miss करती है या नही!!!” मैंने जानना चाहा।
“बहुत ज्यादा!!! उस दिन के 2-3 दिन के बाद रात में वह सो नही पा रही थी। हारकर उसने मुझे कॉल किया लेकिन मैंने नही उठाया। सुबह मेरे मोबाइल में उसकी 62 मिस्ड कॉल चढ़ी थीं।
कुछ दिन बाद उसने msg किया और माफी मांगने लगी…उसने कहा कि वह मजाक कर रही थी..उसे ऐसा नही कहना चाहिए था। उस रात वह सो नही पायी।
एकदिन अपने वादे को तोड़ते हुए उसने कहा कि हम मिलें या नही लेकिन आपस में बातें कर सकते हैं।
उसके बाद करीब 3-4 महीने तक हम एक-दूसरे से कनेक्ट रहे लेकिन धीरे-धीरे हमारी बातचीत कम होने लगी। अब पिछले 6 महीने से हमने एक-दूसरे से  कोई बात नहीं की।”
“अब आगे का क्या इरादा है???” मैंने पूछा।
“भाई!!! दिन – रात पढ़ाई में लगा रहता हूँ। उससे किया हुआ promise पूरा करना है।बस अब किसी भी तरह से GOVT. जॉब पाना चाहता हूँ।”
“Good!!! मैं ईश्वर से प्रार्थना करूँगा कि आपकी मेहनत रंग लाए और आप success हों।”
“Ha bhai!!! लेकिन कभी कभी डर भी लगता है कि कहीं मैं success न हो पाया तो आकांक्षा को कभी पा नही सकूंगा…”
“Don’t worry!!!!! हमारे हाथ में कर्म करना है उसका result अच्छा आएगा या बुरा इस तरफ सोचना बंद कर दो।आप बस अपनी तरफ से पूरी मेहनत करो…बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दो।” मैंने एक पवित्र पुस्तक का सार उसे समझाते हुए कहा।
“Ha bhai!!मैं मेहनत कर रहा हूँ।”
“तो फिर वादा रहा कि आप सारी चीजों से ध्यान हटाकर सिर्फ कैरियर पर फोकस करेंगे??”
“Ha bhai! मैं पूरी कोशिश करूंगा।”
“Very good!!!”
” bhai!!!मेरे जज्बातों को समझने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया!!!!”
“Thanks किस बात का!!!!मेरा यही काम है।”
“अच्छा तो अब चलता हूँ…good luck…” मैंने कहा और 2 मुस्कुराती हुई इमोजी चिपका दीं।
❤?

(bhupendra142dwizz@gmail.com)

 #DISCLAIMER:  – कहानी को पूरा करने के लिए कल्पना का सहारा लिया है।

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