Tag: कविता
काहे के नववर्ष ? ( भोजपुरी भाषा में )
काहे के नववर्ष ? ( भोजपुरी भाषा में ) जीवन में जब नइखे कवनो हर्ष, कवन खुशी में मनावल जाओ नववर्ष? कोरोना सब कइलस चौपट, जिंदगी लेलस अइसन करवट! चहुंओर हाहाकार बा, किसान मजदूर भी आंदोलन पर मजबूर बा; अन्नदाता के इ हालत? हो गईल बा। लड़िकन के रोजी रोटी छिनाइल, फिर# ता#रे मारल…
नव वर्ष 2021 की शुभ कामनाएं
नव वर्ष 2021 की शुभ कामनाएं नव वर्ष 2021 शुभ कामनाएं हैं शुभ कामनाएं, ऐ नूतन वर्ष दो हजार इक्कीस। तेरा आना मंगलकारी हो, समृद्धिशाली हो, प्रकाशीय हो,। प्रशंसनीय हो, स्वास्थ्य वर्धनीय हो। स्वागत है स्वागत है खुशियां मनायें।। शुभकामनाएं हैं ०।।, बीतते वर्ष की तमता न दिखे, कोरोना रोग की रुग्णता न…
मुहब्बत से कभी देखा नहीं है
मुहब्बत से कभी देखा नहीं है मुहब्बत से कभी देखा नहीं है! जाने क्यूं वो होता अपना नहीं है पराया कर गया वो उम्रभर को मुहब्बत का रिश्ता रक्खा नहीं है बढ़ेगी प्यार की बातें कैसे फ़िर इशारा भी कोई उसका नहीं है मुहब्बत का उसे कैसे दूं में गुल…
नव वर्ष 2021
नव वर्ष 2021 –> नये साल 2021 की सब अपनों को, पहुँचे ढ़ेरों बधाई 1.जैसा गुजरा अच्छा गुजरा, अब देना है विदाई | हम सब मिलकर करते हैं, 2020 से आज जुदाई | याद रहेगा अनंत काल तक, कोरोना ने फैलाई चटाई | विदा करो बड़ी धूम-धाम से, मत…
2020 पर एक एक नजर
2020 पर एक एक नजर 2020 था विष का थैला, कोरोना का था बोलबाला, दुनिया में मचाया हाहाकार, घर-घर मचा दिया कोहराम, सब पर हो गया है भारी, बना दिया है सबको भिखारी, रोजी बची न रोटी, गरीब मरे, बिन रोटी, कोरोना भैया आए, दूर-दूर सबको भगाए, पति ,पत्नी से, पिता ,पुत्र से, प्रेमी,…
इजाजत् मिले तो
इजाजत् मिले तो –>इजाजत मिले जो मुझे, मेहबूब की नजर से || 1.मैं चाँद तोड़ लाऊँ, जुगनू को साथ ले कर | तारों को भी ले आऊँ, मुस्कान तेरी कह कर | रुख मोड दूँ हवा का, जब-जब तू मुस्कुराये | बादल हो जाएं घनेरे, तेरी जुल्फ जो लहराये | –>इजाजत मिल जोे मुझे,…
नया साल : नयी आशाएं
नया साल : नयी आशाएं ******* बीता यह वर्ष रे आया नववर्ष रे! झूमो ओ काका झूमो रे काकी रात अंतिम यह बाकी? नाचो ए बबलू नाचो ए बबली गाओ ना भैया गाओ ना भाभी बजाओ सब ताली सजाओ जी थाली? छोड़ो पटाखा करो धूम धड़ाका थिरकना जरा सा डिस्को जरा सा! है रात मतवाली…
मैं चाहता हूं
मैं चाहता हूं मैं चाहता हूं तुम्हारे हृदय में दो इंच ज़मीन जहाँ तुम रख सको मुझे विरासत की तरह सम्भाल कर पीढ़ियों तक बिना गवाएँ एक इंच भी……. बस तुम इतना कर लेना ज़मीन की तरह मुझ में बोते रहना अपने प्रेम का अंकुर और देखते रहना अपलक बढ़ते हुए……!! ? कवि : सन्दीप…
रब की अदालत
रब की अदालत 1. वो मजलूमों को बेघर कर बनाया था अलीशां मकां यहां, गरीब,लचारों की बद्दुवा कबूल हो गई रब की अदालत में वहां अब बरस रहा बद्दुवाओं का कहर देखो , जमींदोज हो रहा अलीशां मकां यहां। 2. हुआ घमंड जब-जब वो गिराते रहे बार-बार, हुआ तालीम, परोपकार जब-जब उन्हीं दुवाओं…
चाय
चाय ** अच्छी मीठी फीकी ग्रीन काली लाल कड़क मसालेदार होती है, नींबू वाली, धीमी आंच वाली, दूध वाली, मलाई और बिना मलाई की, लौंग इलायची अदरक वाली भी होती है। मौसम और मूड के अनुसार- लोग फरमाइश करते हैं, तो कुछ डाक्टरों की सलाह पर- मन मारकर फीकी ही पीने को विवश हैं। यह…