इजाजत् मिले तो
इजाजत् मिले तो

इजाजत् मिले तो

 

–>इजाजत मिले जो मुझे, मेहबूब की नजर से ||

1.मैं चाँद तोड़ लाऊँ, जुगनू को साथ ले कर |
तारों को भी ले आऊँ, मुस्कान तेरी कह कर |
रुख मोड दूँ हवा का, जब-जब तू मुस्कुराये |
बादल हो जाएं घनेरे, तेरी जुल्फ जो लहराये |

–>इजाजत मिल जोे मुझे, मेहबूब की नजर से ||

2.तेरे आगे सब जहाँ के, फीके पड़े हैं चेहरे |
गालों पे लटकी जुल्फें, जो दे रही हैं पहरे |
हांथो मे डाला कंगन, नौ लख्खा है गले पर |
क्या गजब ढ़ा रहा हैं, कानों मे पहना झुमका |

–>इजाजत मिले जो मुझे, मेहबूब की नजर से ||

3.तेरे दांत जैसे मोती, लिपटा बदन में सोना |
हीरे की सी चमक है, पारो कहूँ या मोना |
चाँदी की सी चमक की, माथे लगाई बिन्दिया |
सर की ये तेरी चुनरी ने, चुराई है मेरी निन्दिया |

–>इजाजत मिले जो मुझे, मेहबूब की नजर से ||

4.हिरनी सी चाल उसकी, चलती है जब मटक के |
बिजली गिराती नजरें, देखे वो जब पलट के |
बारिस सी जब-जब बरसें, कायल हुए अदा पर |
न जाने कितनी बारी, घायाल हुए हम उन-पर |

–>इजाजत मिले जो मुझे, मेहबूब की नजर से ||

❤️

लेखक:  सुदीश भारतवासी

Email: sudeesh.soni@gmail.com

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