Aaj ki nari par kavita

  • आज की नारी | Aaj ki Nari Poem

    आज की नारी (  Aaj ki nari par kavita )   मंजिलों  को  पा  रही मेहनत के दम पर नारी संस्कार संजोकर घर में महकाती केसर क्यारी   शिक्षा खेल राजनीति में नारी परचम लहराती कंधे से कंधा मिलाकर रथ गृहस्ती का चलाती   जोश  जज्बा  हौसलों बुलंदियों की पहचान नारी शिक्षा समीकरण देखो रचती…