Aaj ki nari par kavita

आज की नारी | Aaj ki Nari Poem

आज की नारी

(  Aaj ki nari par kavita )

 

मंजिलों  को  पा  रही मेहनत के दम पर नारी
संस्कार संजोकर घर में महकाती केसर क्यारी

 

शिक्षा खेल राजनीति में नारी परचम लहराती
कंधे से कंधा मिलाकर रथ गृहस्ती का चलाती

 

जोश  जज्बा  हौसलों बुलंदियों की पहचान नारी
शिक्षा समीकरण देखो रचती नए कीर्तिमान नारी

 

दुनिया की दौड़ में आगे सबसे अव्वल आती है
कौशल दिखला जग में दुनिया में नाम कमाती है

 

नीलगगन  से  बातें  करती सैर चांद सितारों की
रणचंडी योद्धा बन जाती चमक तेज तलवारों की

 

बागडोर संभाले देश की कमान हाथ में रखती है
पढ़ी-लिखी  नारी  कल्पना  चावला  बनती  है

 

आज की नारी सबला है सशक्त हौसलों वाली
देशप्रेम भरा रग रग में करती सरहद रखवाली

 

ज्ञान ज्योत जलाकर नारी उजियारा लाती घर में
प्रगति पथ पर चली आज की नारी डगर डगर पे

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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