Antarman

  • अंतर्मन | Antarman

    अंतर्मन ( Antarman )   टूट भी जाए अगर, तो जुड़ जाती है डोर एक गांठ ही है जो कभी, खत्म नहीं होती मन की मैल तो होती है, दबी चिंगारी जैसे जलने भी नही देती, बुझने भी नही देती रोता है अंतर्मन, मुस्कान तो सिर्फ बहाना है मजबूरी है जिंदा रहना, यही अब जमाना…