Antarman

अंतर्मन | Antarman

अंतर्मन

( Antarman )

 

टूट भी जाए अगर, तो जुड़ जाती है डोर
एक गांठ ही है जो कभी, खत्म नहीं होती

मन की मैल तो होती है, दबी चिंगारी जैसे
जलने भी नही देती, बुझने भी नही देती

रोता है अंतर्मन, मुस्कान तो सिर्फ बहाना है
मजबूरी है जिंदा रहना, यही अब जमाना है

पाला था दिल से, लगाया था अपने गले
हुई क्या जरूरतें पूरी, जाकर गैर से मिले

उम्मीद, भरोसा, विश्वास, सब एक दिखावा है
मतलब से मिलना है, न पूछिए क्या हुआ है

सफर मे बनना है , हमसफर भी साथी भी
करते हैं एहसान लोग,बताकर अपना नाम भी

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

तजुर्बा | Tajurba

Similar Posts

  • मैं हूं एक जग भिक्षुक

    मैं हूं एक जग भिक्षुक मैं भिक्षुक हूं यारों बस, इस सारे जमाने का,कुछ नहीं है मेरे पास, लोगों को दिखाने का।। जरिया भी नहीं है मेरे पास रोटी कमाने का,साधन भी नहीं खुद को जग से मिटाने का।। मैं कोई गीत भी नहीं हूं जमाने के गुनगुनाने का,मैं सरगम भी नहीं हूं दीवाने के…

  • मां की आँखों के हम भी तारे हैं

    मां की आँखों के हम भी तारे हैं मां की आँखों के हम भी तारे हैंमेरे जैसे ज़मीं पे सारे हैं। इक नदी सी है ज़िन्दगी यारोसुख के मिलतें नहीं किनारे हैं देखता आजकल जिधर मुड़करहर तरफ़ ग़म के आज मारे हैं हम ख़ुशी की तलाश में अब तकग़म के मारे थे ग़म के मारे…

  • लोग क्या कहेंगे | Kavita Log Kya Kahenge

    लोग क्या कहेंगे ( Log Kya Kahenge ) हमें लोग क्या कहेंगे, अब लोगों को भी कहने दो। मतलब की है सारी दुनिया, स्वार्थ में ही रहने दो। तुमको अब बढ़ते जाना, कुछ काम ऐसा कर लो। जीवन में कुछ है पाना, खुशियों से झोली भर लो। साध लो अब निशाना, मंजिल पर तुमको जाना।…

  • कार्तिक पूर्णिमा | Kartik Purnima

    कार्तिक पूर्णिमा ( Kartik purnima )   कार्तिक पूर्णिमा पावन पर्व स्नान ध्यान दान का। देव दिपावली त्योहार मनाते सनातन विधान का। गंगा धारा में दीपक पूजन अर्चन हो श्रद्धा भाव से। मनोकामना पूर्ण होती धन वैभव हो शुभ प्रभाव से। सहस्त्रों नर नारी नदी तट भाव भक्ति से करें स्नान। नारायण की पूजा होती…

  • मैं क़लम हूं

    मैं क़लम हूं स्वेत रुप है मेरी कायाभेद छल से दूर हूं मैंनिश्छल है मेरी कायाइतिहास लिखा नन्हे कदमों सेभविष्य भी हूं मैं तुम्हाराहां मैं क़लम हूं बच्चों का दोस्त हूं मैंदिलाता हूं उन्हें सफलता प्याराजो बिगड़ें बोल बोले कोईतो कालदण्ड हूं मैं तुम्हाराहां मैं क़लम हूंहां मैं कलमकार हूं नवीन मद्धेशिया गोरखपुर, ( उत्तर…

  • तारक मेहता का उल्टा चश्मा

    तारक मेहता का उल्टा चश्मा °°°°°° –> ऐपिसोड हुए 3000 अभी, आगे भी होने बांकी हैं |?|   1.निश दिन नूतन संदेशा लाते, खुद हँसते और हंसाते हैं |   अलग-अलग है कल्चर फिर भी, संग-संग रोते-गाते हैं |   गोकुल धाम केे सब हीरे-मोती, एक धागे मे पिरोये हैं |   उदासी मे खुशियां…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *