चौहान शुभांगी मगनसिंह जी की कविताएँ | Chauhan Shubhangi Poetry
हर युग में चलते चलीं कविता हर युग मेंचलते चलीं कवितालोग क्या कहेंगेयह नहीं सोचतीं कभीहाशिए पर फेंक दिए घटक को प्राथमिक स्थान दिलाती कवितामेघों को अपना दूत बनाकरभावों को व्यक्त करतें कालीदासरामायण के रचयितावाल्मिकीहो या राम के दास तुलसीदासलहर लहर पर लहरातेकामायनी लिखते जयशंकर प्रसादमैं अकेलामैं अकेला…गाते हुए निराले से निरालादुख की बदलीअधूनिक मीरा…

