Dhara par Kavita

  • धरा | Dhara par Kavita

    धरा ( Dhara )    धरा मुस्कुराई गगन मुस्कुराया खिल गए चेहरे चमन महकाया रंगों से रोशन हुई ये अवनी सारी धरती पे खुशियों का मौसम छाया खेतों में सरसों लहराई पीली ओढ़ ली धरा ने चुनरिया रंगीली महका मधुमास मदमाता आया मस्ती में झूमे समां हरसाया गुलशन सारे लगे फिर महकने प्रेम के मोती…