दशहरा | Dussehra
दशहरा! ( Dussehra ) दशहरा सदा यूँ मनाते रहेंगे, कागज का रावण जलाते रहेंगे। फूहड़ विचारों को कहाँ छोड़ पाए, रस्मों-रिवाज हम दिखाते रहेंगे। चेहरा मेरा एक दिखता जगत को, बाकी वो चेहरा छुपाते रहेंगे। भ्रष्ट रहनुमाओं से क्या मुक्ति मिलेगी, नहीं तो बजट वो चबाते रहेंगे। करते हैं पाप, तन धोते हैं गंगा,…

