हृदय के स्पंद हो तुम | Hriday ke Kpand Ho Tum
हृदय के स्पंद हो तुम ( Hriday ke spand ho tum ) ऊर्जस्वित प्राण करते आदि कवि के छंद हो तुम। हृदय के स्पंद हो तुम। जन्म जन्मान्तर से परिचित, किन्तु नयनों ने न देखा। अन्तर्गुहा के घन तिमिर में, प्रज्वलित बन रश्मि रेखा। तुम मेरी आराधना के, साधना के देवता हो, आदि सीमाहीन,…

