Hriday ke Kpand Ho Tum

हृदय के स्पंद हो तुम | Hriday ke Kpand Ho Tum

हृदय के स्पंद हो तुम

( Hriday ke spand ho tum )

 

ऊर्जस्वित प्राण करते
आदि कवि के छंद हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

जन्म जन्मान्तर से परिचित,
किन्तु नयनों ने न देखा।
अन्तर्गुहा के घन तिमिर में,
प्रज्वलित बन रश्मि रेखा।

तुम मेरी आराधना के,
साधना के देवता हो,
आदि सीमाहीन, फिर भी
पुतलियों में बन्द हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

एक ही आधार हो तुम,
इस विश्व पारावार में।
यदि नहीं तुम हुये अपने,
फिर शेष क्या संसार में।

सघन स्वप्निल शून्यता में,
सत्य शिव सुन्दर तुम्हीं हो,
शान्ति सुख की सर्जना में,
सहज परमानन्द हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

 

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

रक्तबीज सी अभिलाषाएं | Raktabeej

Similar Posts

  • तुलसी विवाह | Tulsi Vivah

    तुलसी विवाह ( Tulsi vivah )   भजन कर भाव भक्ति से, शालिगराम आए हैं। सजा लो सारे मंडप को, प्रभु अभिराम आए हैं। सजी तुलसी होकर तैयार, तुझे वृंदावन जाना है‌। वृंदा कर सोलह श्रृंगार, द्वारिका नाथ रिझाना है। ठाकुर जी हो रथ पे असवार, बाराती झूमते गाते। बजे शहनाई तुलसी द्वार, चेहरे सबके…

  • गणगौर त्योहार | Gangaur Tyohar par Kavita

    गणगौर त्योहार ( Gangaur tyohar )    ईसर गौरी की पूजा होती पावन गणगौर का त्योहार। गोरी सज धज शिव शंकर को वंदन करती बारंबार। कुंवारी कन्याएं सोलह दिन गौरी पूजन कर आती। जल दूब अर्पण शिव गौरी गौर गौर गोमती गाती। सिंदूर मेहंदी चूड़ा चढ़ाती कर गोरी सोलह सिंगार। मनचाहा वर दो शिव भोले…

  • कैसे लिखू | Kaise Likhoon

    कैसे लिखू ( Kaise Likhoon )   कैसे लिखू प्रेम गीत जब वर्दी खून से भीगे है कैसे देखूं बसंत के फूल जब आंख अश्रु से भीगे हैं कैसे भेजूं मैं प्रियसी को फूल जो मेरे भाई को चढ़ने है कैसे लिखू प्रेम गीत जब हृदय का रोना जारी है कैसे गाऊं मै प्रेम गीत…

  • वट सावित्री व्रत | Kavita Vat Savitri Vrat

    वट सावित्री व्रत ( Vat Savitri Vrat ) ( 2 ) अल्पायु सत्यवान का, सावित्री संग व्याह हुआ, दृढ़ संकल्पित सावित्री को, इस बात से भय जरा न हुआ, महाप्रयाण के दिन यमराज, लेने आए जब प्राण सत्यवान, संग सावित्री भी चलीं, तब दिए यमराज वरदान, थी ज्येष्ठ मास की अमावस्या, वट के नीचे सावित्री…

  • संवेदनाएं | Sanvedanaen

    संवेदनाएं ( Sanvedanaen )    जिम्मेदारियों के बोझ से जब दब जाती है जिंदगी सपने रह जाते हैं सपने ही तब न रात होती है न दिन निकलता है सुबहोशाम मे फर्क ही नहीं होता दुनियावी भीड़ के माहौल मे किसी अपने को तलाशती नजर भटकती ही रह जाती है पर ,कोई अपना नहीं मिलता…

  • नियति चक्र | Kavita Niyati Chakra

    नियति चक्र ( Niyati Chakra )   टूट जाते हैं तारे भी लगता है ग्रहण चाँद और सूरज को भी बंधे हैं सभी नियति चक्र के साथ ही रहा यही नियम कल भी आज भी हो सकते हैं कर्म और धर्म झूठे परिणाम कभी गलत नहीं होता जीवंत जगत में मिले छुट भले प्रारब्ध में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *