आओ करें बागवानी | Kavita Aao Kare Bagwani
आओ करें बागवानी ( Aao Kare Bagwani ) डाल-डाल चिड़िया चहके, ताल-तलइया पानी। कल-कल करके बहती नदिया, गाँव करे अगवानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी। पेड़ न रोने पाएँ कहीं पे, इसपे नजर गड़ाना। छाँव न घटने पाए धरा पे, मिलकर इसे बचाना।…

