बेसुरी बांसुरी | Kavita Besuri Bansuri
बेसुरी बांसुरी ( Besuri bansuri ) क्यों बनाते हो जीवन को बेसुरी सी बांसुरी फूंक कर सांसों को देखो सुर भरी है राग री। चार दिनों की चांदनी है फिर अधेरी रात री। कब बुझे जीवन का दीपक कर लो मन की बात री। जोड़ कर रख ले जितना भी धन सम्पत्ति…

