Kavita Haqeeqat

  • हकीकत की भूल | Kavita Haqeeqat

    हकीकत की भूल ( Haqeeqat ki Bhool )    संवरती नही कभी हकीकत की भूल नुमाइश की जिंदगी कागज के फूल बंजर जमीं के नीचे व्यर्थ बीज की गुणवत्ता लोभी नेता के हाथों फली कब देश की सत्ता भरते हैं उडान हरे परिंदे सभी को आसमान नहीं मिलता और की उम्मीद पर गुल नही खिलता…