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मन का डर | Man ka Dar
मन का डर ( Man ka Dar ) चलते चलते न जाने कहाँ तक आ गये हैं, कामयाबी की पहली सीढ़ी शायद पा गये हैं, कुछ पाने का जूनून आँखों में है बसा हुआ मगर पहला क़दम रखूं कैसे डर ये सता रहा, ख़ुद पर इतना यक़ीन कभी किया ही नहीं, कुछ जीत लेने…