पहचान | Kavita Pahchan
पहचान ( Pahchan ) हम खामोश ही रहे और वो बोलते चले गए शुरू हि किया था हमने बोलना और वो उठकर चले गए यही हाल है आजकल के अपनों का न गिला रखते हैं न शिकायत करते हैं माहिर हो गए हैं वो वक्त के बस बोलने की कला रखते हैं उम्मीद रख…
पहचान ( Pahchan ) हम खामोश ही रहे और वो बोलते चले गए शुरू हि किया था हमने बोलना और वो उठकर चले गए यही हाल है आजकल के अपनों का न गिला रखते हैं न शिकायत करते हैं माहिर हो गए हैं वो वक्त के बस बोलने की कला रखते हैं उम्मीद रख…