Kavita Parakh

  • परख | Kavita Parakh

    परख ( Parakh )   न था आज कल से जुदा न होगा आज कल से होती नही स्थिरता जल में कभी हो रही नित हलचल से जुड़ा है धागा समय से घटनाएं हैं मनके जैसी हर मनके का है मूल्य अपना जीवन में हर एक सांस जैसी हर लम्हे दे जाते हैं कुछ हर…