Kavita Parakh

परख | Kavita Parakh

परख

( Parakh )

 

न था आज कल से जुदा
न होगा आज कल से
होती नही स्थिरता जल में कभी
हो रही नित हलचल से

जुड़ा है धागा समय से
घटनाएं हैं मनके जैसी
हर मनके का है मूल्य अपना
जीवन में हर एक सांस जैसी

हर लम्हे दे जाते हैं कुछ
हर लम्हे ले जाते हैं कुछ
लेन देन के इसी व्यवहार में
करनेवाले भी कर जाते हैं कुछ

दामन भर नही देता आकर कोई
पासरना भी होता है उसे
निकल गये हैं जो लोग आगे
साथ के लिए पुकारना भी होता है

हर वक्त के फैसले गलत हि नही होते
हर फैसले सही हि नही होते
परखना भी होता है हाले दौर के साथ
दौर को भि मगर दोष हि नही देते

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मुराद | Kavita Murad

Similar Posts

  • यह विचारणीय विषय है | Vicharniy vishay kavita

    यह विचारणीय विषय है ( Yah vicharniy vishay hai )      आज-कल के दौर में कोई घर-घर नहीं लगतें है, मक़ान तों है बड़े-बड़े पर इन्सान नहीं दिखते है। होतें पहले कच्चे-मकान पर रिश्ते पक्के होते थें, अपनें आपको आज सभी होशियार समझते है।।   पहले का ज़माना और था आज ज़माना और है,…

  • अर्थ जगत | Kavita Arth Jagat

    अर्थ जगत ( Arth Jagat )   अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ************ उद्गम राजस्थानी मरुथल धरा, न्यून वृष्टि संसाधन विहीन । तज मातृभूमि आजीविका ध्येय अंतर्मन श्रम निष्ठ भाव कुलीन । प्रायः राष्ट्र हर क्षेत्र श्री गमन , लघु आरंभ बुलंद आर्थिक आवाज । अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ।।…

  • मन

    मन बहुत शक्तिशाली हैव्यापक हैउसका साम्राज्यउसकोचुनौती देने वालाकोई नहीं हैअतः भलाई हैप्रकृति के नियम केसाथ चलने में हीसार नहींविपरीत दिशा में कोईमन में कालुष्य न आयेकर्म काट करइतना हिम बनकरचले कि खुद केसंगति वह जो नीति सिखायेवैराट्य प्रकट होवाणी में वैर-भावन उगने पायेराग- द्वेष से दूरहो जायें औरध्रुवतारा -सी चमकलिए सारे जगत मेंचमक सही सेआत्मा…

  • नव-वर्ष शुभ-कामना | Nav-Varsh Shubhkamna

    नव-वर्ष शुभ-कामना ( Nav-varsh shubhakaamana )   सारा जग  सुंदर स्वस्थ रहे,             सानंद  रहे  सकुशलता  हो।    स्नेह  प्रेम  ममता  का मधु ,             अपनेपन की आकुलता हो।।    निज देश जाति के बंधन में ,             आकर्षण  हो  परिवारों  सा।    कर्तव्य कर्म का क्षणक्षण हो,            स्वर्णिम मधुरिम उपहारों सा।।   करुणा…

  • अनमोल है बिटिया | Anmol Hai Bitiya

    एक अनमोल रत्न है बिटियाखुशियों की सौगात है बिटिया सुबह की पहली किरण है बिटियाघर आंगन महकाती है बिटिया मां की परछाई होती है बिटियादो परिवारों का मान बढ़ाती है बिटिया सबके मुकद्दर में कहां होती है बिटियामाता-पिता का दुख समझती है बिटिया थोड़ी नटखट थोड़ी शैतान होती है बिटियासंस्कार और शिक्षा से समाज को…

  • अर्थ | Arth

    अर्थ ( Arth ) अर्थ में ही अर्थ हैअर्थ के बिना सब व्यर्थ है। सत्य साधना या सत्कारसभी के लिए है यह जरूरी,जीवन का आवश्यक यह शर्त हैअर्थ के बिना सब अनर्थ है। सीधे मुॅंह कोई बात नहीं करतानजर रहती सभी की वक्र है,साज सम्मान के लिए यह जरूरीअर्थ नहीं तो यह दुनिया लगती व्यर्थ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *