तब तुम कविता बन जाती हो | Kavita Tab Tum
तब तुम कविता बन जाती हो ( Tab tum kavita ban jati ho ) झरनें की कल कल में, खग चहके जल थल में, सूर्य किरण तेज़ फैलाये पवन भीनी सुगंध बहाये जब प्रकृति सुंदरता बिखराती हो, तब तुम कविता बन जाती हो । कलम के सहारे, मेरे दिल पात्र में उतर आती हो…

