Tag: Madiralay par Kavita
मदिरालय | Madiralay par Kavita
मदिरालय ( Madiralay ) पड़ा धुत नशे में राही मदिरालय को जाता। लड़खड़ाती जिंदगी है समझ नहीं वो पाता। मय प्याला हाथों में छलके जामो पे जाम। ये कैसी दीवानगी छाई घर हो जाए नीलाम। बेखुदी में रह बेसुध है मधुशाला को जाए। पीने वाले पी रहे हैं हाला हाला मद भाए। सोमरस सुधारस…