मगर | Magar
मगर ( Magar ) बेशक जिंदा हो तुम अपने भीतर जी भी लोगे हाल पर अपने किंतु, क्या जी सकोगे घर के भीतर ही ! समाज जरूरी है समाज और शहर के लोग जरूरी हैं देश और जगत का साधन जरूरी है बिना और के जीवित रहना संभव ही नहीं तब भी तुम्हारा यकीन…

मगर ( Magar ) बेशक जिंदा हो तुम अपने भीतर जी भी लोगे हाल पर अपने किंतु, क्या जी सकोगे घर के भीतर ही ! समाज जरूरी है समाज और शहर के लोग जरूरी हैं देश और जगत का साधन जरूरी है बिना और के जीवित रहना संभव ही नहीं तब भी तुम्हारा यकीन…