मानवता ही धर्म हमारा | Manavta hi Dharm Hamara
मानवता ही धर्म हमारा ( Manavta hi dharm hamara ) जहां प्रेम की सरिता बहती, सद्भावो की नव धारा। मजहब में क्या रखा भाई, मानवता ही धर्म हमारा। मानवता ही धर्म हमारा अपनापन दीन ईमान हो, शुभ कर्म कीर्तिमान हो। मधुर तराने राष्ट्रगान, कड़ी मेहनत स्वाभिमान हो। पीर हर लें दीन दुखी की, ऐसा…

