Tag: Mazdoor par Kavita
मजदूर है मजबूर | Mazdoor par Kavita
मजदूर है मजबूर ( Mazdoor hai majboor ) जो मज़दूर था वह आज मजबूर हो गया, न रहा कोई काम वह बेरोजगार हो गया। निर्भर था पूरा परिवार उसकी दिहाड़ी से, रोज़गार उसके हाथ से सारा दूर हो गया।। इस महामारी को लेकर आया था अमीर, आज इस मज़दूर को बेचना पड़ा ज़मीर।…
मजदूर | Poem mazdoor
मजदूर ( Mazdoor ) मजदूर दिवस पर रचना मुश्किल से टकराता है मेहनत को वो अपनाता है गरम तवे की रोटी खातिर परदेस तलक वो जाता है हाथों का हुनर रखता है वो महल अटारी करने को खून पसीना बहा देता पेट परिवार का भरने को मजदूर आज मजबूर हुआ महंगाई की…

वो मजदूर है | Mazdoor kavita
वो मजदूर है ( Wo mazdoor hai : Kavita ) अरे! वो मजदूर हैं इसीलिये तो वो मजबूर हैं उनकी मजबूरी किसी ने न जानी मीलों का सफर तय किया पीकर पानी। पांव में जूते नही छाले पड़ गए थे भारी अमीरो को तो लेने जहाज गए विदेश, उनके लिये तो बसों के भी…

हम मजबूर हैं | Mazdooron ki vyatha par kavita
हम मजबूर हैं ( Hum majboor hai ) साहब! हम मजदूर हैं इसीलिए तो मजबूर हैं सिर पर बोझा रख कर खाली पेट,पानी पीकर हजारों मील घर से दूर गोद में बच्चों को लेकर अनजान राहों पर चलने को। बेबस हैं हम,लाचार हैं हम आए थे काम की तलाश में पर,इस #Lockdown में न…