वो मजदूर है

वो मजदूर है | Mazdoor kavita

 वो मजदूर है

( Wo mazdoor hai : Kavita )

 

अरे! वो मजदूर हैं
इसीलिये तो वो मजबूर हैं
उनकी मजबूरी किसी ने न जानी
मीलों का सफर तय किया पीकर पानी।
पांव में जूते नही छाले पड़ गए थे भारी
अमीरो को तो लेने जहाज गए विदेश,
उनके लिये तो बसों के भी लाले पड़ गए थे।

अमीर घर में बैठा बोला!
आजकल तो सड़क भी सुनसान है
उनसे कहो निकल कर तो देख!
सड़क पर चारों तरफ
खून से सने पैरों के निशान है
शहर में आये थे रोजी-रोटी के  लिये
लेकिन आज तो वो मरने के भी मोहताज हो गए हैं।

वो माँ कितनी मजबूर हैं
जवाब भी नही दे सकती
जब बच्चे पूछते है माँ! घर ओर कितनी दूर है…..
सड़क बीच में जन्म देकर बच्चों को
वो माँ मीलों का सफर तय करती हैं।

चुप बैठी सरकार फिर भी कुछ नहीं करती हैं
अपना होने का झूठा दिलासा ये मालिक देते थे,
इन झूठे दिलासों से आज भी लाखों मजदूर मरते हैं।
वो इसीलिये मरते हैं… क्योंकि वो मजदूर हैं!
इसलिये तो वो मजबूर हैं।।

🌱

    लेखिका : मोनिका चौबारा

( फतेहाबाद )

यह भी पढ़ें :

हे सरकार ! कुछ तो करो | Political kavita

Similar Posts

  • अनुराग से उजियार

    अनुराग से उजियार जगमग धरती उजियार , स्नेह दीप है आज lहर कण में दीप सजे , हुवा अंधकार बौना l धन की वर्षा विश्व में , करती चंचल लक्ष्मी lसमय और विवेक की , शिक्षा से झोली भरी l माँ से मेवे – मिटाई , पिता से पटाकी lनभ को चंद्रमा तो , घर…

  • आत्मविश्वास | Kavita Atmavishwas

    आत्मविश्वास ( Atmavishwas )   आत्म विश्वास है जीवन के संघर्षों को हराकर जीतने का संकल्प। आत्मा की अनन्य शक्ति, आत्मा को शिखर तक पहुंचाने का प्रकल्प।। जीवन की हर बाधा, प्रतिबाधा में घोर निराशा से उबरने का विकल्प ।। आच्छादित अंधेरे में, घोर ना उम्मीदी मे प्रकाश की किरण का प्रकल्प।। उम्मीद की रोशनी,…

  • जब जंगल रोए

    जब जंगल रोए – कांचा गचीबोवली की पुकार ( दिकुप्रेमी की कलम से ) कुछ आवाज़ें मौन होती हैं,जैसे टूटी टहनियों की टीस,जैसे मिट्टी से उखड़ते पेड़ों की कराहजिन्हें कोई सुनना नहीं चाहता। तेलंगाना के कांचा गचीबोवली वन क्षेत्र मेंविकास की आड़ मेंविनाश का वाक्य लिखा गया।जहाँ कभी हवाओं की सरसराहटकवियों को गीत देती थी,वहाँ…

  • ना बताएं ओटीपी पासवर्ड | OTP Password Par Kavita

    ना बताएं ओटीपी पासवर्ड ( Na Bataye OTP Password )   बचकर रहना प्यारे भाईयों एवं बहनों, आज जाल-झूठ और छल-कपट से। कमा रहे है बहुत छलिया लोग लफंगे, करके जाल-झूठ एवं ये हेरा-फेरी से।। बहक मत जाना लालच में मत आना, लाॅटरी व ईनाम, कूपन के चक्कर में। गंवा ना देना कही उमर-भर की…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -आफर

    आफर ( Offer )   क्या  कोई  ऐसा  भी  है  जो, दुखी  हृदय  घबराए। प्रेम दिवस पर मुझे बुलाकर,पिज्जा, केक खिलाए।   इससे  पहले  भाग्य  अभागा, सिंगल  ही मर जाए। फोन  करे  हुंकार  को  पहले, आकर  आफर पाए।   आँखों  मे  आँखो  को  डाले, मन  की  बात  करेगे। पुष्प  गुलाब  का  तुम  ले आना, बालों…

  • ऐसा कौन करता है | Kavita

    ऐसा कौन करता है? ( Aisa kon karta hai )   तीव्र ज्वर में, भीषण दर्द में। घर में घर पर ही- जो कोई अपना पुकारे, क्या छोड़ देंगे उसे ईश्वर के सहारे? पीड़ा से भरा वह चीख रहा था, नजरों से अपनों को ढ़ूंढ़ रहा था। सभी थे पास, फर्क ना पड़ रहा था…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *