मुकेश बिस्सा की कविताएं | Mukesh Bissa Hindi Poetry
फिर सुबह आएगी अंधेरों की बिसात पर, थकी हुई ये रात है,मगर ये अंत तो नहीं, बस वक्त की एक बात है।दिए की लौ जो बुझ गई, तो गम न कर तू ऐ मुसाफिर,क्षितिज पे फिर उगेगा सूरज, ये कुदरत की सौगात है।जो काँटों भरी राहों में, कदम तेरे डगमगाए हैं,जो गर्दिशों के बादलों ने,…

