मुकेश बिस्सा की कविताएं | Mukesh Bissa Hindi Poetry
दास्तान किसी मोड़ पर ठहरी हुई,वक्त की एक पुरानी पहचान,धूल जमी सी यादों में छुपी,दिल की वो अधूरी दास्तान। कभी हँसी की छांव में पली,कभी आँसुओं में भीगी रात,कभी खामोश लम्हों ने लिखा,कभी बोल उठे जज़्बात। राहों ने जो मोड़ लिए,कदम भी साथ बहकते गए,कुछ चेहरे धुंधले हो गए,कुछ दिल में ही बसते गए। हर…

