Naushaba Poetry

  • नौशाबा की कविताएँ | Naushaba Poetry

    अफ़सोस ज़िंदगी की राहों में,हर कोई तकलीफ़ों से गुज़रता है,तपता है गम की धूप मे कभीकभी देखता है स्वप्न खुशियों केमगर अफ़सोस !डसते हैं रात के अंधेरे बहुतभोर का उजाला भी ठहरता कहाँ है! सालते ही रहते हैंटूटे ख्वाबों के एहसासहर लम्हा बीती घड़ी का हिस्सा होता हैदूर दूर तक रहती हैं विरानियाँहर पल गुजरा…