Poem dharamyudh

  • धर्मयुद्ध | Poem dharamyudh

    धर्मयुद्ध ( Dharamyudh )   जीवन के इस धर्मयुद्ध में, तुमको ही कुछ करना होगा। या तो तुमको लडना होगा,या फिर तुमको मरना होगा।   फैला कर अपनी बाँहो को, अवनि अवतल छूना होगा। कृष्ण ज्ञान के अर्जुन बनकर,गीता राह पे चलना होगा।   कर्मरथि बन कर्तव्यों का, तुम्हे निर्वहन करना होगा। या तो अमृत…