Poem Ghar ki Izzat

  • घर की इज़्ज़त | Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat ) यह हुनर दिल में ढाल कर रखनाघर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँकोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँअपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जायेदर्द दिल का निकाल कर रखना मैं हूँ…

  • घर की इज्जत | Poem Ghar ki Izzat

    घर की इज्जत ( Ghar ki Izzat )   यश कीर्ति किरदार बने हम घर खुशहाली मची रहे। प्यार और सद्भावो से खुशियों की घड़ियां जची रहे। घर की इज्जत बची रहे मान और सम्मान वैभव पुरखों की धरोहर है पावन। मिले बड़ों का साया सदा आशीष बरसता रहे सावन। रिश्तो में मधुरता घोले घर…