बचपन के दिन और खेल | Poem in Hindi on Bachpan
बचपन के दिन और खेल ( Bachpan ke din aur khel ) कहां गए वो दिन बचपन के ,पचपन खेल हम खेले नाचे गाए मौज मनाएं ,देखे घूम घूम कर मेले।। कितनी थी सतरंगी दुनिया ,रंगों का था दिलसे मेल एक सीध में दौड़ लगाकर ,छू छू कर दौड़ाए रेल ।। खेल खिलौना…

