Poem in Hindi on kasak

  • कसक | Poem in Hindi on kasak

    कसक ( Kasak ) रौशनी की तलाश में हम बहुत दूर निकल आये जहाँ तक निग़ाह गई बस अन्धेरे ही नजर आये जिन्दगी ने हमें दिया क्या और लिया क्या सोच के वक्त के हिसाब आँसू निकल आये कसक दिल में रहती है अपनो को पाने की समझ  नहीं  आता अपना किसे कहा जाये अपनो …