खंजर लेकर घूम रहे हैं | Poem khanjar lekar ghoom rahe hain
खंजर लेकर घूम रहे हैं ( Khanjar lekar ghoom rahe hain ) खंजर लेकर घूम रहे हैं कुछ अपने कुछ बेगाने। किसे सुनाऊं कौन सुनेगा हाले दिल ये अफसाने।। कुछ तो भोला कह देते हैं कुछ कहते मगरूर बड़ा कुछ कहते ये नहीं बराबर, कहते कुछ मशहूर बड़ा कैसे इनको समझाएं अब,…

