मन एक परिंदा है | Poem man ek parinda hai
मन एक परिंदा है ( Man ek parinda hai ) ये मन एक परिंदा है उड़ाने ऊंची भरता। स्वप्न लोक विचरण सकल विश्व करता। मन के नयन हजार मन जाए सरिता के पार। पंखों को व्योम पसार घूमे सपनों का संसार। कभी झूमता कभी नाचता मतवाला सा गाता। पंछी मनवा सैर सपाटा…

