Poem on bhookh aur pet

  • भूख और पेट | Poem on bhookh aur pet

    भूख और पेट ( Bhookh aur pet )   सड़क पुल नदियों को निगले डकार नहीं लेते आंधी है या कोई तूफान बहार आने नहीं देते   कुछ को धन की भूख है कुछ का पेट बहुत बड़ा जाने कितने ही घोटालों का हंगामा हो गया खड़ा   भुखमरी बेरोजगारी अब गरीबी दूर होनी चाहिए…