रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry
जलजला हूं जलजला हूं आग की भांति जला हूं।सच्चाई की डगर पे अब बढ़ चला हूं।हौसलों से लिखूं संघर्षों की कहानी।आंधियों तूफानों में निर्भय पला हूं। काव्य रस घोलती कलम सयानी।भावों की धारा बहती उर सुहानी।कुंदन बन सांचे में तपकर ढला हूं।महफिलों में कारवां लेकर चला हूं। वीरों का गुणगान गाता हूं गीतों में।प्रीत भी…

