समझदार कौन | Samajhdar Kaun
समझदार कौन ( Samajhdar kaun ) लहू लुहान पैरों का दर्द हाथों मे पड़े छाले माथे से टपकती स्वेद की बूंदे धौकनी सी धड़कती छाती का हिसाब शायद ईश्वर की किताब मे भी नही औलादें तो अभी व्यस्त हैं अपनी ही औलादों को खुश रखने मे… औलादों ने शायद छोड़ दिया है खुद को…

