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Hindi Poetry On Life | Hindi Ghazal -सजा
सजा ( Saza ) मेरी गलतियों की मुझको सजा दे गया, बेवफा था मुझे वो दगा दे गया। क्या बताए हमें क्या सजा दे गया, मेरी खुशियों के सपने जला के गया। आइने सा ये दिल तोड कर चल दिया, इतने टुकडे किये कि मैं गिन ना सका। …