Shahro ki or

  • शहरों की ओर | Kavita

    शहरों की ओर ( Shahro ki or )     छोड़ दिया घर बार गांव चल पड़े शहर की ओर चकाचौंध के पीछे दौड़े भूल गए सुहानी भोर   भागदौड़ भरी जिंदगी फुर्सत का कोई नाम नहीं शहरों का जीवन ऐसा अपनेपन का काम नहीं   फैशन के दीवाने होकर लोग चले शहर की ओर…