शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry
पृथ्वी आज रोती पृथ्वी आज रोती करती हमसे विनती मत कर मेरा दोहन मैं हूं तेरा संजीवन पेड़-पौधे हैं मेरे वास मत कर इसका उपहास हिमनद हैं मेरी संरचना कर तू इसकी अर्चना मत कर तू अबीर लगा एक पेड़ जरूर देर सबेर,देर सबेर टेर पर टेर,टेर पर टेर धरा का मैं नीला सागर धरा…

