श्रीराम चालीसा | Shri Ram Chalisa
राम चालीसा दो० राम ब्रह्म जगदीश हरि, भक्त हृदय निष्काम। गुरु पद नख विग्रह निरखि, वन्दउँ सीताराम। चतुरानन शिव हिय बसे, प्रणव तत्व साकार। राम नाम सुमिरन किये, मिटे सकल भव भार। चौ० जय श्री राम जगत प्रतिप्राला। संत हृदय प्रभु दीन दयाला। दशरथ गेह लिए अवतारा। हरन हेतु अवनी कै भारा। अनघ अनादि तत्व…

