सिलसिला जब से मुहब्बत का हुआ | Romantic Poetry
सिलसिला जब से मुहब्बत का हुआ! ( Silsila jab se muhabbat ka hua ) सिलसिला जब से मुहब्बत का हुआ! और भी रिश्ता उससे गहरा हुआ आशना तो वो रहा बनकर मुझसे वो नहीं दिल से मगर मेरा हुआ देखता था जो कभी उल्फ़त नजर आज मेरा दुश्मन वो चेहरा हुआ …

