उदासी | Udasi par Kavita
उदासी ( Udasi ) बादल जैसी छाई उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।। दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे हो महंगाई उदासी ।। सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।। सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।। शमा जली …
उदासी ( Udasi ) बादल जैसी छाई उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।। दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे हो महंगाई उदासी ।। सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।। सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।। शमा जली …