Udas kavita

उदासी

( Udasi )

 

बादल  जैसी  छाई  उदासी ।
घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।

 

दिन-दिन बढ़ती ही जाती है ।
जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।

 

सूने दिल में बजती जैसे ।
दूर कहीं शहनाई उदासी ।।

 

सागर की लहरों सी खुशियां
सागर की गहराई उदासी ।।

 

शमा  जली  जब  सूरज डूबा ।
धुंआ -धुंआ सा लाई उदासी ।।

 

✍?

 

लेखक : : डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 नोनिया करबल, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

यह भी पढ़ें : –

आगों में | Aagon mein kavita

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here