Udas kavita

उदासी | Udasi par Kavita

उदासी

( Udasi )

 

बादल  जैसी  छाई  उदासी ।

घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।

 

दिन-दिन बढ़ती ही जाती है ।

जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।

 

सूने दिल में बजती जैसे ।

दूर कहीं शहनाई उदासी ।।

 

सागर की लहरों सी खुशियां

सागर की गहराई उदासी ।।

 

शमा  जली  जब  सूरज डूबा ।

धुंआ -धुंआ सा लाई उदासी ।।

 

 

लेखक :  डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 नोनिया करबल, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

यह भी पढ़ें : –

आगों में | Aagon mein kavita

Similar Posts

  • मदर टेरेसा | Mother Teresa par Kavita

    मदर टेरेसा ( Mother Teresa )    सेवा भाव और करुणा की यह प्रतिमूर्ति, वह मदर टेरेसा जिनकी आज है जयंती। 26 अगस्त 1910 यूगोस्लाविया जन्मी, पढ़ना-लिखना गीत गाना पसन्द करती।। अगनेसगोंझा बोयाजिजू था इनका नाम, गिरजाघर प्रार्थना करती गायिक समान। आयरलैंड से आई कोलकाता शिक्षिका, विद्यार्थी करतें इनसे बहुत प्यार सम्मान।। ग़रीब अस्वस्थ निर्बल…

  • मां कात्यायनी | Maa Katyayani

    मां कात्यायनी ( Maa Katyayani )    पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से वर्तमान विज्ञान प्रौद्योगिकी युग, मां दुर्गा षष्ठी छवि पूजन विशेष । शोध अनुसंधान दक्षता मैया, जीवन कृपा दृष्टि अधिशेष । जन्म जन्मांतर पाप मुक्ति, ब्रजमंडल अधिष्ठात्री साधना से । पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से ।। केहरी आरूढ़ा मात भवानी,…

  • मन तू क्यूं ना माने ?

    मन तू क्यूं ना माने ? मन तू ,क्यूं ना माने ?सबको क्यूं , अपना माने । सब होते ना ,यहां अपने ।कुछ होते, हैं बेगाने । बनते हैं, बहुत ही अपने ।दिखाते, नित नए सपने । फिर एक दिन, रंग दिखाते ।उनके नकाब, गिर जाते । वो प्रेम ,कहीं खो जाता ।ढूंढ़े से,नज़र ना…

  • क्या तुम कभी | Kavita Kya Tum Kabhi

    क्या तुम कभी? ( Kya tum Kabhi ) हाँ, तुम मुझे जानते हो…, पर अगर प्रश्न करूँ, कितना जानते हो…? तुम अनमने से हो जाते हो, बहुत सोचते हो, पर जवाब क्या है? कुछ आदतों को बताते हो, पर स्त्रीत्व को नहीं समझ पाते हो। एकांत क्या है, यह स्त्री से पूछो। आदतों और व्यवहार…

  • नजर फेर कर चले कहां | Nazar pher kar chale kahan

    नजर फेर कर चले कहां ( Nazar pher kar chale kahan )   महक रही मस्त हवाये चमन खिले हम मिले जहां ओ मनमौजी छोड़ हमें नजर फेरकर चले कहां   याद करो पल सुहाने मनमीत मिले तो चैन मिले इक दूजे के नयन दमकते नैन मिले तो रैन खिले   दिल की हसरतें ख्वाब…

  • बाल-गोपाल नन्द के लाल | Kavita Nand ke Lal

    बाल-गोपाल नन्द के लाल ( Bal-Gopal Nand Ke Lal )    बाल- गोपाल बाबा नन्द के लाल, कर दो कन्हैया फिर ऐसा ‌कमाल। जग मे रहें ना कोई दुःखी इन्सान, जीवन बने यह सब का खुशहाल।। सारे जगत के हो आप पालनहार, भवसागर से करते है सबको पार। बिन कृष्णा नाम के जीवन बेकार, तुम्हारी…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *