योगाचार्य धर्मचंद्र जी की कविताएँ | Yogacharya Dharmachandra Poetry
मुर्दे से वसूली एक बहन जो, भूख और,दवा के बिना ,दम तोड़ दिया ।किसी प्रकार से,उसके पति एवं बच्चों ने,उसे घाट पर,दाह संस्कार हेतु ,लाया तो,सोचा था कि ,मशीन से जला देंगे तो,कुछ पैसे बच जाएंगे ,परंतु मशीन बंद थी । अब शुरू हुआ खेल,मुर्दों से वसूली का ,पहले तो लकड़ी,किसी प्रकार से ,उधार बाड़ी…

