योगेश की कविताएं | Yogesh Hindi Poetry
इंसानियत मर रही कितना क्रूर होता जा रहा अब मानव,मानवता क्रूरता में बदलती जा रही,अपने स्वार्थ की हर सीमा लांघ रहा,बुद्धिमत्ता, समझदारी क्षीण होती जा रही,रिश्ते – नाते,अपने – पराए,सब भूल रहा,इंसानियत भी अब शर्मसार हुए जा रही,दोष इन सबका हालातों को दिया जा रहा,मगर झांककर देखो ये नशे की लत हर घर अपना आतंक…

