बात

बात

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रात हुई
ना बात हुई
क्या बात हुई?
कुछ खास हुई!
नाराज हुई
नासाज हुई
ऐसी क्यों हालात हुई?
बड़ी खुश थी!
जब मुलाकात हुई
फिर इस खामोशी की
वजह क्या हुई?
जो वो रूठ गई
क्या सचमुच मुझसे कुछ भूल हुई?
क्या बात ही कोई चुभ गई?
जाने एकदम क्यों वो चुप हो गई?
ऐसे तो ना चलेगा!
बातों से ही हल निकलेगा
खामोशी दूरियां बढ़ाएंगी
गलतफहमियां बढ़ती जाएंगी
मन में घाव कर जाएंगी
बातें ही बात बनाएगी
मुश्किल हालात से निकाल लाएगी
प्रेम की गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ाएगी
बहारें फिर से जीवन में लौट आएंगी।

 

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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