अवध के धाम जाएंगे

अवध के धाम जाएंगे

 

अवध के धाम जाएंगे, राम के दर्शन पाएंगे।
उत्सव मिल मनाएंगे, झूम-झूम नाचे गाएंगे।
अवध के धाम जाएंगे

शब्दाक्षर मंच पावन, संगम होने वाला है।
मनोरम छटा भावन, मोती पिरोने वाला है।
राष्ट्र के गीत गुंजेंगे, राष्ट्रीय सम्मेलन होगा।
कवि मुखर सुनाएंगे, फनकार मिलन होगा।
शब्दाक्षर हुआ सिरमौर, पदाधिकारी आएंगे।
देश के कोने कोने से, कवि नर नारी गाएंगे।
अवध के धाम जाएंगे

हर्ष अधरो पर छाया, चेहरे पर खुशियां छाई है।
अयोध्या चलने की भारी, उमंगे दिल में छाई है।
शब्दों ने लिया आकार, आयोजन होना भारी है।
रविजी को है बहुत साधुवाद, सुंदर हुई तैयारी है।
शब्दों की राम-राम माला, जपेंगे गुणगान गाएंगे।
काव्य कलश के मोती, सुधा रसपान कराएंगे।

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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