क़लम की ताकत: एक लेखिका की जुबानी

क़लम की ताकत

मेरी क़लम है मेरी जुबां,
जिससे कहती हूँ हर दास्तां।
हर दर्द, हर खुशी के रंग,
इसी से रचती हूँ मैं जीवन के ढंग।

यह स्याही नहीं, यह भावना है,
जो दिल से निकल, कागज पर थामना है।
हर अक्षर में बसती है एक सदी,
यह कलम तो मेरे सपनों की नदी।

कभी चुप रहकर चीखती है,
अन्याय पर सवाल उठाती है।
कभी सुकून की झलक दिखाती,
तो कभी क्रांति की मशाल जलाती।

यह कलम है आवाज़ मेरी,
जो छूती है हर दिल की देहरी।
हर पन्ना मेरा साथी बन जाता,
जब शब्दों का दरिया बह जाता।

यह कलम मुझे साहस देती,
हर मुश्किल में साथ रहती।
इसके स्पर्श से बदलती है दुनिया,
यह है मेरे जीवन की अनमोल कड़िया।

तोड़ सकती है यह हर दीवार,
लिख सकती है यह नए विचार।
मेरे शब्द अमर हो जाएं,
सदियों तक यह गूंज सुनाए।

कलम की ताकत अनमोल है,
यह मेरी सबसे बड़ी दोस्त है।
मैं लेखिका हूँ , यही मेरी पहचान,
कलम है मेरी शक्ति, मेरी जान।

नारी शक्ति की प्रतीक व हिन्दी साहित्य जगत की’ दीपशिखा” -सादर !

कवयित्री : श्रीमती बसंती “दीपशिखा”
प्रतिष्ठित लेखिका, सामाजिक चिंतक
अध्यापिका एवम् विभागाध्यक्ष
हैदराबाद, वाराणसी, भारत।

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